30 जनवरी, 2017

समय पर घोंसले में लौटना ज़रूरी है





विचारों की अभिव्यक्ति की
अनुभवों की
स्वतंत्रता ज़रूरी है
लेकिन,
बिना पतवार के
नदी पार करने की ज़िद
स्वतंत्रता नहीं
...
मुमकिन है
हवा के अनुकूल बहाव के साथ
किनारा मिल जाए
लेकिन,
यह संभावना भी हो सकती है
किनारा पतवार के साथ भी आसान नहीं होता !
या तो प्रारब्ध किनारे पर लौटना होता है
या नज़दीकी किनारे तक की यात्रा होती है
एक किनारे से
वास्तविक दूसरे किनारे तक
... दुर्लभ ही होता है !

गिरना
गिरकर उठना एक सीख है
अनुभव है
पर सिर्फ गिरने की मंशा
सही नहीं  ...
बरगद की कथा
यूँ ही नहीं लिखी जाती
कहानियों
कविताओं
सूक्तियों से गुजरना होता है
सोना बनने के लिए तपना होता है
चाक पर चढ़ने के लिए
खुद को कुम्हार के हवाले करना होता है
उड़ान कितनी भी ऊँची हो
समय पर घोंसले में लौटना ज़रूरी है
महत्वपूर्ण है
आँधियों का कोई भरोसा नहीं होता
...

27 जनवरी, 2017

प्यार करने का एक ज़रूरी रास्ता यह भी है




तुम खो जाओ
खो दो अपनी क्षमताएँ
अपनी काबिलियत
उससे पहले एक ख़ामोशी बुनना शुरू करो
और उसे एक दिन डाल लो अपने ऊपर
...
नहाओ
खाओ-पियो
अपनी दिनचर्या के साथ
भरपूर नींद लो
उम्मीदों की
चाहतों की पोटली
उसी आलमीरे में रख दो
जिनसे ये जुडी थीं
बोलो मत
अपने ख्यालों में व्यस्त हो जाओ
अपनी ज़िन्दगी के लिए
अपने को जितना ख़ास बनाया
उस खासियत के लिए
बुनो ख़ामोशी  ...
...
जब तक शब्द होते हैं
लोग बहरे होते हैं
बेहतर होगा
उनसे
मूक भाषा में भी
कुछ कहना छोड़ दो
कोशिश करके ही सही
तुम अवाक' होकर
समझने की कोशिश करो
उनके सवाल  ...

उस सवाल से पहले
तुम्हें अपनेआप को और मजबूत करना होगा
प्यार करने का एक ज़रूरी रास्ता यह भी है
...

23 जनवरी, 2017

दो अलग स्थिति




"पिंक" एक बहुत अच्छी फ़िल्म !
जो प्रश्न उसमें उठे,
वे झकझोर गए,
 लेकिन  ... !!

समाज को हटा दो
तथाकथित रिश्तों की बात हटा दो
खुद अपना मन
अपना मस्तिष्क
उस हादसे से नहीं उबरता  !!!
कोई देखे
ना देखे
देखते हुए नज़र आते हैं !

परिस्थिति की माँग के अनुसार
उद्देश्य से परे
यदि अपने हाथों हत्या हो गई
तब तो एक चुप दहशत
आस-पास
साथ साथ होती है !!

बहस से
मन नहीं उबरता  ...
बहस
दूसरे लोग करते हैं
पक्ष-विपक्ष से बिल्कुल अलग-थलग
हादसे से गुजरी मनःस्थिति
जुड़कर भी
नहीं जुड़ती !

हादसा होना
हादसे पर बात करना
दो अलग स्थिति है !!

18 जनवरी, 2017

Yes I wish...




गुड़िया घर में खेलते हुए, 
स्कूल से कॉलेज तक सपने सजाते हुए 
एक लड़की "माँ" बन जाती है 
इत्मीनान से अपना बचपन फिर आँखों में भरती है 
.... 
अपने सपनों में 
अपने जाये के सपने भरती है 
थकती है 
ढूँढती है कोई विश्वसनीय हथेली 
जिसे थमाकर वह खुद में चाभी भर सके 
नई बैटरी लगा सके 
.... 
आश्चर्य, 
नहीं मिलने पर वो हारती नहीं 
बच्चे के भागते क़दमों से ऊर्जा लेती है 
उसकी मुस्कान से तरोताजा हो जाती है 
और एक नया दिन जीती है  .... 

मेरी बेटी, खुशबू की दिनचर्या से उभरे ख्याल, 
हर माँ, 
हर पिता के लिए 



How I wish...there was someone reliable at Home who I can give you when I wanted to have 5 more minutes of sleep in the morning but couldn't as you were wide awake...
How I wish...there was someone reliable at Home who I can give you when I wanted to peacefully have a coffee but couldn't as you were crawling and standing to hold anything and everything...
...
How I wish there was someone reliable at home who I can give you when I wanted to cook a nice meal and have it in one go but couldn't as you started crying the moment I went to kitchen...
....
How I wish there was someone reliable at home who I can give you when I wanted to lie down to take some rest in the afternoon but couldn't as you were ready for your lunch..
....
How I wish there was someone reliable at home who i can give you when in the evening I wanted to watch something on TV just to refresh myself but couldn't as you were all cranky because you were feeling sleepy yet wanted to play...
How I wish there was someone reliable at home who i can give you when at night after having a tiring day I just wanted to sleep on more than half of the bed but couldn't as you were super playful....
...
Aah how I wish...
BUT
The moment I leave my 5 minutes of sleep and wake up, say it's a good day and a good morning to you, you give me the best morning smile...it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...

The moment I leave my coffee and come running after you saying Kunu ko pakdo, you start giggling...that giggle calms my senses like no coffee can do...it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...

The moment I open the kitchen door to pick you up and you come crawling fast and hold my legs...I get all the energy that no food can ever give...it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...

The moment I give up my afternoon nap to feed you...and with all the chidiya tota kabootar game when you finish your lunch... my heart gets all the rest which no afternoon sleep can give...it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...

The moment I switch off the TV and take you in my arms, play peek a boo closing your eyes and you give a toothless smile to me... then, after playing for a while you fall asleep in my arms, it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...
The moment at night to stop you from playing more, I tell you lights off, waking time over and you jump on my face give me a kiss, start making so many sounds out of which I understand 'Mamma' and 'nai ni nai ni nai ni', it's then I wish that only you and me , be in our beautiful world...

And when you end our day with your good night...and I watch you sleeping by my side it's then I realise that even if there is someone reliable at home I won't be able to enjoy any moment without you...Yes I wish...I wish you keep loving me, needing me like this forever... Yes I wish...I wish that only you and me , be in our beautiful world...

KHUSHBOO PRIYADARSHINI 

चलो बच्चे बन जाओ

हर बार कहा कहते आये हैं - बड़े हो जाओ तुम बड़े हो गए तुम बड़ी हो गई तुम भी बड़ी हो गई लेकिन मैं ! जब कहीं से हारी थकी अपने स्वप्निल...